गोल्डन फेअसंत (golden pheasant) दुनिया का सबसे खूबसूरत पछी…..

गोल्डन फेअसंत दुनिया में पाया जाने वाला सबसे खुबशुरत पच्छी हैं। ये चीन के पश्चिम में स्थित पहाड़ियों में पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें चीनी फेअसंत या रेनबो फेअसंत भी कहते हैं। यह मुख्यतः लाल रंग की शरीर होती है जिसमे इसके सिर पर संतरे रंग होते हैं जो पीठ की तरफ जाती हैं , इसमे काले रंग के धब्बे इसके पूछ से सिर की तरफ होती है जो इसे और भी खुबशुरत बनाती है।
दुनिया में गोल्डन फेअसंत के लगभग 35 प्रजातीय पाई जाती है। इसमें वयस्क नर पच्छी की लंबाई 90 से 105 सेंटीमीटर तक हो सकता है, इसकी पूछ इसकी लंबाई की 2/3 होती है, इनके टैंगो का कलर पिला होता है।

गोल्डन फेअसंत एक सर्वाहारी पच्छी है, यह घास , बीज, सब्जिया, कीड़े, आदि चीजे खाता हैं, यह अधिकतर जमीन पर ही रहना पसंद करता है हवा में ये पच्छी बहुत कम उड़ते हैं परंतु खतरा लगते ही के बहुत तेजी से हवा में उड़ सकते है। जमीन में इनकी रफ्तार 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटा है तथा हवा में ये पच्छी 75 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकते हैं । जब ये पच्छी हवा में उड़ते है तो इनके परो से आवाज आती है जो बहुत ही अच्छी लगती है।

गोल्डन फेअसंत एक बार में 8 से 12 अंडे देते है जिसमें से 22 से 23 दिनों बाद बच्चे निकलने शुरू हो जाते। जब बच्चे छोटे होते है तो उनकी माँ उन्हें बीज , सब्जी , कीड़े, घास खिलाती है । ठंड के दिनों में आम तौर पर आप इन्हें पेड़ पर बैठे देख सकते हैं परंतु दूसरे मौसम में ये बहुत कम ही दिखाई देते हैं , यदि आपको इन्हें किसी और मौसम में देखना हैं तो ये सिर्फ चिड़ियाघर में ही दिखेंगे।
वेज्ञानिको के मुताबित गोल्डन फेअसंत की देखने और सुनने की छमता बहुत अच्छी होती है, जिससे कि वे शिकारियों से बचने में उपयोगी होती हैं। यह पच्छी एक ही जगह पर रहना पसंद करती हैं जिससे कि इन्हें माइग्रेटरी बर्ड नही माना जाता है। गोल्डेन फेअसंत कई दिनों तक बिना खाये रह सकती है। चीन में इस पच्छी को गुड लक माना जाता है, जिससे कि वहां के लोग इस पछि की हिफाजत करते है। नर पच्छी को रोस्टर और मादा पच्छी को हेंन कहा जाता है, वैज्ञानिको का मानना है कि गोल्डन फेअसंत 5 से 6 साल तक जीवित रह सकते है लेकिन अगर कैप्टिविटी मैं। रखा जाए तो 15 से 20 साल तक जीवित रह सकती है।
इस बेहद ही खूबसूरत पच्छी के कई शिकारी भी है उनमें सबसे पहले मनुष्य ही है उसके बाद लोमड़ी, जंगली कुत्ते, आदि जानवर भी है । गोल्डेन फेअसंत धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर आ चुके हैं इनके विलुप्त होने का सबसे बड़ा कारण जंगलो का धीरे- धीरे विनास क्योंकि ये जानवर अधिकतर जंगलो में रहना पसंद करते हैं या पहाड़ी इलाको में। कुदरत के बनाये इस नायाब पच्छी की सुरक्षा हम सब को मिल के कारण चाहिए तथा सरकार को इसके आबादी की संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि कोई भी इनका शिकार न कर सके और इनकी आबादी में बढ़ोतरी हो।

Amit Shrivastava

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