संसार भर में जगतपिता ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है!

हिंदू धर्म में अनेक जगह सभी देवी देवताओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। सभी देवी देवताओं के प्रमुख स्थल पर मंदिर बने हुए हैं। पूरे संसार में सबसे श्रेष्ठ 3 प्रधान देवता को माना जाता है। जो ब्रह्मा, विष्णु,और महेश है। इन तीनों देवताओं को सबसे बड़ा माना जाता है। तीनों देवता अपनी-अपनी संरचना के आधार पर जाने जाते हैं। सबसे बड़े ब्रह्मा जो इस संसार के रचनाकार हैं, फिर विष्णु जो संसार के पालनहार है, और महेश जो संसार के संहारक हैं। लेकिन आपने विष्णु और शिव का मंदिर तो हर क्षेत्र हर जगह में देखा होगा। परंतु क्या आपने ब्रह्मा जी का मंदिर देखा है! या काभी ब्रह्मा जी का पूजा की है! क्या आपने कभी सोचा है, ब्रह्मा का मंदिर कहां है? या हर जगह इनका मंदिर क्यों नहीं है!आइए हम जानते हैं कि ब्रह्मा जी का मंदिर कहां है। और हर जगह इनका मंदिर क्यों नहीं है।

ब्रह्मा जी का सिर्फ एक ही मंदिर है! जो राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ पुष्कर में स्थित है। यह मंदिर 14 वीं शताब्दी की है ऐसा माना जाता है कि!यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है पुष्कर में लगभग 500 से ज्यादा हिंदू मंदिर थे।लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने शासनकाल में ज्यादातर मंदिरों को नष्ट कर दिया था। लेकिन ब्रह्मा जी के मंदिर को छू तक नहीं सका। बाद में फिर से मंदिरों का निर्माण किया गया, जो इनमें से सबसे सर्वश्रेष्ठ मंदिर ब्रह्मा जी का है।

आइए जानते हैं पुष्कर में इनका मंदिर कैसे बना!

हिंदू ग्रंथ पद्म पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने एक दानव वज्रभ को देखा जिस ने आतंक मचा रखा था। ब्रह्मा जी ने उस राक्षस को मार दिया इस दौरान ब्रह्मा जी के हाथों से कमल का फूल पृथ्वी पर गिरा। वहां पर पुष्कर झील उत्पन्न हुई कमल के फूल के गिरने पर,फूल तीन हिस्सों में टूट गया था। और तीनों स्थानों पर अलग-अलग गिरा। जहां पर जेष्ट पुष्कर, मध्य पुष्कर, और कनिष्ठ पुष्कर झील उत्पन्न हुई। तब ब्रह्मा जी इस स्थान पर आए, और जहां फूल ब्रह्मा जी के हाथ से गिरा था इस स्थान का नाम पुष्कर पड़ा।

ब्रह्मा जी का मंदिर हर जगह क्यों नहीं है! तथा ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं होती! आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य!

वेदों के अनुसार कहा जाता है कि! ब्रह्मा ने सृष्टि रचना के लिए राजस्थान के पुष्कर में एक यज्ञ का आयोजन किया था। इसी यज्ञ में उनको अपने पत्नी के साथ बैठना जरूरी था। लेकिन उनकी पत्नी सावित्री वहां पर नहीं थी। और उन्हें पहुंचने में देरी लग रही थी। पूजा का मुहूर्त निकला जा रहा था सभी देवी देवता उसी स्थल पर पहुंच चुके थे। सिर्फ सावित्री ही नहीं आ पाई थी। जब शुभ मुहूर्त निकलने लगा। तब मजबूरन ब्रह्मा जी ने नंदिनी गाय के मुख से गायत्री को प्रकट कर लिया। और उनसे विवाह कर अपना यज्ञ संपन्न कर लिया।जब सावित्री पहुंची तो ब्रह्मा जी के बगल में अपनी जगह किसी अन्य स्त्री को देख अत्यंत क्रोधित हुई। और उसी समय ब्रह्मा जी को उन्होंने  श्राप दे दिया। कि आप जिस संसार की रचना करने के लिए मुझे भूल गए आपको भी उसी प्रकार संसार भूल जाए। और आपको कभी भी संसार नहीं पूजेगा। बाद में सभी देवी देवताओं में किसी तरह देवी सावित्री का क्रोध शांत किया। तथा अपना श्राप वापस लेने के लिए कहा गया। परंतु एक बार श्राप देने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता। इसलिए उन्होंने कहा कि आपका मंदिर यही पुष्कर में ही बनेगा तथा आपका पूजन भी वही होगा।

suraj yadav

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